देश के कबूतरों पर काली छाया -समस्त महाजन ने उठाई आवाज

   वसई- विरार शहर महानगरपालिका, मुम्बई   ने कबूतरों को दाना डालने से मना किया  

              

रिपोर्ट:डॉक्टर आर.बी. चौधरी


प्रधान संपादक एवं मीडिया हेड (अवकाश प्राप्त ),भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ,

वन,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय,भारत सरकार


       

5  अप्रैल ,2019;मुंबई (महाराष्ट्र)
जीव दया के साथ साथ पर्यावरण एवं ग्रामोत्थान के दिशा में समर्पित मुंबई की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था "समस्त महाजन' ने पशु-पक्षियों के कल्याण के लिए अब अपनी रणनीति बदल दी है और उन पर हो रहे अत्याचार को उजागर करने हेतु कमर कस लिया है. समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश भाई  का मानना है कि वसई - विरार   महानगरपालिका ,मुंबई द्वारा कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाना एक अनुचित ही नहीं बल्कि एक अमानवीय कार्य है .उन्होंने मुंबई शहर में चलाएं जा रहे एक अभियान के तहत सभी पशु प्रेमियों को सामने आने का अनुरोध किया है और बताया कि गर्मी के दिन में पशु। पक्षियों की बदहाली एवं तड़प -तड़प कर मरने की बात भला किस को नहीं पता है. तपती धूप में अनगिनत पशु -पक्षी चारे -दाने के आभाव में हर साल अपने प्राण गवा बैठते हैं.

गिरीश भाई शाह आज शहर में पशु प्रेमियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वसई - विहार महा
नगरपालिका ,मुंबई ने कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाया है जब सारे देश भर के पशु -प्रेमी पशु पक्षियों के लिए जगह जगह पर पानी देने की व्यवस्था में भाग रहे हैं.सभी लोग कोशिश कर रहे हैं कि इस साल की तपती धूप से ज्यादे  से ज्यादे पशु पक्षियों को प्राण रक्षा की जाए.उन्होंने बताया कि जहां दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल के एक पुलिस-एक पक्षी प्रेमी को राष्ट्रपति ने इस साल विशेष पुरस्कार से नवाजा है, वहीं पर मुंबई में इस साल की जानलेवा गर्मी से ही कबूतरों को दाना डालना प्रतिबंधित कर दिया गया है.पशु कल्याण आंदोलन का यह एक दुखद हालात है.

शाह ने बताया कि  पिछले साल  कबूतरों के  "बीट"  पर प्रकाशित  कुछ नकारात्मक समाचारों  के माध्यम से यह गलत संदेश पहुंचाया गया है  जिसमें यह बताया गया कि कबूतरों के "बीट" से बीमारी हो सकती है। इस  समाचार का सबसे अधिक असर वसई - विरार महानगरपालिका ,मुंबई पर पड़ा है  और उन्होंने आनन फानन में कबूतरों को दाना डालने, उनके द्वारा गंदगी फैलाने और पब्लिक में बीमारी फैलने की आशंका के कारण आम आदमी  को दाना डालने से  प्रतिबंधित कर दिया.  इस आदेश से  मुंबई ही नहीं , देशभर के पशु प्रेमी दुखित हो गए हैं क्योंकि यह आदेश ऐसे समय आया है जब देशभर में पशु प्रेमी पशुओं के लिए जल प्रबंधन हेतु "वाटर बाउल्स"-पानी के पात्र  रखने की तैयारी कर रहे हैं.

गिरीश भाई भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य के रूप में यह बताया है कि बोर्ड की सचिव डॉक्टर नीलम बाला ने तत्काल वसई - विरार महानगरपालिका ,मुंबई को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी मांगी है ताकि इस मामले पर कोई तत्कालिक कदम उठाया जा सके.बोर्ड सचिव ने अपने पत्र में वसई - विरार महानगरपालिका ,मुंबई को  भारतीय संविधान की धारा 51 ए (जी ) का हवाला देते हुए अवगत कराया है  कि भारत के संविधान की मर्यादा रखें जिसमें लिखा गैया है कि भारत के   "वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण को बढ़ावा देने और सुधारने के लिए और सभी जीवित प्राणियों के लिए दया भाव रखा जाएगा". साथ ही केंद्रीय जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अनुपालन में सभी जीव जंतु पर होने वाले अपराधों को रोकने तथा उन्हें संरक्षण प्रदान करने की भारत सरकार की जिम्मेदारी है.

डॉक्टर नीलम वाला ने अपने पत्र में वर्ष 2009 में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि देश भर के सभी राज्यों एवं गणराज्यों को आदेश दिया गया है किअपने अपने राज्यों में जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम ,1960 को लागू करने और पशु अपराध को रोकने के लिए कार्य करें। ऐसी परिस्थिति में जहां एक ओर  भारतीय संविधान की मर्यादाऔर सम्मान पशुओं की रक्षा में खड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय कानून के अनुपालन में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसी हालत में वसई - विरार महानगरपालिका ,मुंबई का यह आदेश संविधान,न्यायालय एवं केंद्रीय कानून के खिलाफ है.वसई - विरार महा नगरपालिका ,मुंबई के इस मामले की गंभीरता को लेते हुए डॉक्टर बाला ने इसका तत्काल जवाब मांगा है.

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